मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में न तो अपराधियों को बख्शा जाएगा, न भ्रष्ट अधिकारियों को और न ही कानून तोड़ने वालों को। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई अपराधी राजस्थान आएगा, तो उसे उसके उचित स्थान तक पहुंचाया जाएगा।
भजनलाल ने कर्मचारियों से अपील की कि वे जनसेवा में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखें। सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूलमंत्र ‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’ के तहत 103 अधिकारियों को निलंबित, 6 को सेवा से बर्खास्त और 11 अधिकारियों की पेंशन पर रोक लगाई गई। इसके अलावा, रिश्वत, ट्रैप, पद का दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति मामलों में 108 अभियोजन स्वीकृत और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य प्रकरणों में कठोर कार्रवाई की गई।
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता पर भी जोर दिया। पिछली बार स्वच्छ सर्वेक्षण में जयपुर ग्रेटर 16वें स्थान पर रहा, लेकिन अब सभी शहरों को देश के सर्वोत्तम और स्वच्छ शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने पौधारोपण अभियान की जानकारी दी — अब तक 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और इस वर्ष 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य है। इसके अलावा पहली बार चंदन वन का विकास भी किया जा रहा है।
राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फेडरेशन के अधिवेशन में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने फेडरेशन की मांगों पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। अधिवेशन में स्वायत्त शासन विभाग के सचिव, प्रदेश अध्यक्ष और अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे।
इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखना, भ्रष्टाचार को समाप्त करना, कानून का पालन सुनिश्चित करना और राज्य के सभी शहरों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना है। मुख्यमंत्री भजनलाल ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के दलदल से दूर रहना चाहिए और जनसेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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