राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यदि सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के गांवों और शहरी निकायों को उनकी नई सरकार मिल सकती है। इस फैसले के बाद पंचायत और नगरीय चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर चुनावी तैयारियां काफी समय पहले से शुरू कर दी गई थीं और अब केवल आधिकारिक चुनाव तिथियों की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
बांसवाड़ा जिले की बात करें तो इस बार पंचायत चुनाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जिले में कुल 16 प्रधान, 549 सरपंच, 4515 वार्ड पंच, 280 पंचायत समिति सदस्य और 43 जिला परिषद सदस्य चुने जाएंगे। इस बार जिले के लगभग 12 लाख 74 हजार 482 मतदाता गांवों की नई सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाएंगे। यह चुनाव जिले की ग्रामीण राजनीति की दिशा और विकास की गति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इसी तरह नगरीय निकाय चुनावों के तहत बांसवाड़ा में 60 पार्षद, कुशलगढ़ में 20 पार्षद और गढ़ी-परतापुर क्षेत्र में 25 पार्षदों का चुनाव कराया जाएगा। निकाय चुनावों को लेकर भी राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद फिलहाल गांवों में प्रशासकों के माध्यम से प्रशासनिक कार्य संचालित किए जा रहे हैं। लंबे समय से निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण कई विकास कार्य प्रभावित होने की भी बात सामने आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं और जनहित कार्यों पर असर पड़ा है, जिससे स्थानीय लोग भी जल्द चुनाव की मांग कर रहे थे।
अब जैसे-जैसे चुनाव की संभावित तिथियां नजदीक आती दिखाई दे रही हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। पंचायत पुनर्गठन के बाद कई क्षेत्रों की सीमाओं और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हुआ है, जिसके कारण राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति और उम्मीदवार चयन पर काम करना पड़ रहा है। चुनावी माहौल बनने के साथ ही गांवों और कस्बों में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती दिखाई दे रही हैं।